टाइम मशीन की खोज
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| ड्रॉइंग : सखी, कक्षा-7 |
आओ, चलें समय के
आर-पार
- मुकुल सरल
बच्चो, मैंने टाइम मशीन ईजाद कर ली है, या कहूँ
कि खोज ली है। चौंक गए न...! जी हाँ, टाइम मशीन जिसके जरिये समय के आर-पार जाया जा सकता है। भूत
में भी, भविष्य में भी। टाइम मशीन हमारे नए समय की एक लोकप्रिय अवधारणा है, हमारे टी.वी.
कार्टून्स से लेकर हॉलीवुड फिल्मों तक। हम जादुई चिराग़ के सपने देखा करते थे और
हमारे बच्चे टाइम मशीन के सपने देखते हैं। मेरे बच्चे भी अक्सर ऐसे कार्टून और
फिल्में देखते हुए कहते हैं कि काश! हमारे पास भी टाइम मशीन होती तो हम भी किसी भी समय में चले जाते। वे
मुझसे भी अक्सर पूछते हैं कि पापा क्या सच्ची में टाइम मशीन बनाई जा सकती है? मुझे भी उनका टाइम
मशीन का विचार बेहद रोमांचित करता है। इसी तरह देखते-सोचते मुझे ख़्याल आया कि अरे
हमारे पास तो टाइम मशीन पहले से ही मौजूद है! और एक नहीं, कई-कई। आप हँसेंगे पर ये सच है।
हमारी टाइम मशीन हैं : हमारी किताबें, हमारे अख़बार, हमारी तस्वीरें, हमारे ऑडियो/वीडियो, हमारी फिल्में। इन सबके जरिये हम देश-काल-समय के
आर-पार आ-जा सकते हैं। वर्तमान के साथ भूतकाल भी देख सकते हैं और भविष्य का भी
जायजा ले सकते हैं। अपनी किताबों जिनमें इतिहास भी है, भूगोल भी और साहित्य और विज्ञान
भी उनके जरिये ही हमने जाना कि करोड़ों साल पहले हमारी धरती और आकाश-गंगा कैसे
बनी। कैसे मनुष्य अस्तित्व में आया।
इन्हीं किताबों ने हमें बताया कि पाषाण युग कैसा था। आदि मानव कैसे जीता था। उसका भोजन क्या था, कपड़े क्या थे, औज़ार क्या थे। इन सबका पूरा ब्योरा हमें अपनी किताबों में मिलता है। फ्रांसीसी क्रांति, रूसी क्रांति, चीनी क्रांति और भारत का स्वतंत्रता संग्राम कैसे लड़ा और जीता गया, इन्हीं किताबों के जरिये हम जानते हैं। यही किताबें बुद्ध और ईसा का काल बताती हैं। सम्राट अशोक और अकबर के शासन का ब्योरा देती हैं। महात्मा गांधी ने क्या कहा, डॉक्टर आंबेडकर ने क्या किया, झांसी की रानी कैसी दिखतीं थी और भगत सिंह के क्या विचार थे। ये सब किताबों के माध्यम से ही नयी पीढ़ी के पास पहुंचा।
इन्हीं किताबों ने हमें बताया कि पाषाण युग कैसा था। आदि मानव कैसे जीता था। उसका भोजन क्या था, कपड़े क्या थे, औज़ार क्या थे। इन सबका पूरा ब्योरा हमें अपनी किताबों में मिलता है। फ्रांसीसी क्रांति, रूसी क्रांति, चीनी क्रांति और भारत का स्वतंत्रता संग्राम कैसे लड़ा और जीता गया, इन्हीं किताबों के जरिये हम जानते हैं। यही किताबें बुद्ध और ईसा का काल बताती हैं। सम्राट अशोक और अकबर के शासन का ब्योरा देती हैं। महात्मा गांधी ने क्या कहा, डॉक्टर आंबेडकर ने क्या किया, झांसी की रानी कैसी दिखतीं थी और भगत सिंह के क्या विचार थे। ये सब किताबों के माध्यम से ही नयी पीढ़ी के पास पहुंचा।
इन्हीं किताबों से हमें झलक मिलती है कि हमारा
भविष्य कैसा होगा। यही नीतियां जारी रहीं तो पचास या सौ साल बाद देश और दुनिया की
तस्वीर कैसी होगी।
इन्हीं किताबों जिनमें कविता भी शामिल है, कहानी
भी और इसी तरह हमारे नए-पुराने अख़बार भी इन सबके जरिये हमने जाना कि हमारा समाज कैसा था, उसकी क्या भावनाएं, सपने और
आकांक्षाएं थी। शोषण के स्वरूप और समाज को तोड़ने और जोड़ने वाले तत्वों को हमने
इन्हीं माध्यमों से जाना-पहचाना। हमने जाना कि हमारे परिवार और समाज में किस
तरह के बदलाव आए और आगे क्या बदलाव आने वाले हैं। इन किताबों और अख़बारों के जरिये भविष्य की
संभावनाओं का एक पूरा खाका हमारे पास है।
हमारी तस्वीरें भी एक टाइम मशीन हैं। इनके जरिये
हम अपने अतीत में झांक सकते हैं। हम एक तस्वीर देखते समय अपने बचपन में चले जाते
हैं। मैं अभी एक तस्वीर देख रहा था जिसमें मेरी बेटी घुटनों के बल चल रही है, मैं
तुरंत दस साल पुराने उस समय में चला गया जब बेटी चलना सीख रही थी। अपने मां-पिता
की एक तस्वीर देखते समय मैं अपना भविष्य देख रहा था। कैमरे के अलावा कलाकारों ने
अपनी कलम-कूची के जरिये भूत, वर्तमान और भविष्य तक की तस्वीरें बनाईं हैं। आप बीस
साल बाद कैसे दिखेंगे आजकल कंप्यूटर और कलाकार ऐसी भी तस्वीर बनाकर आपको दे सकते
हैं।
हमारे वीडियो जिसमें हमारे घरेलू वीडियो से लेकर
न्यूज़ वीडियो और फिल्में भी शामिल हैं ये तो बाकायदा टाइम मशीन ही हैं। इनमें
हमारा आज-कल बिल्कुल जीवंत रूप में हमारे सामने होता है। चलते-फिरते, हँसते-बोलते।
बिल्कुल हमारी आँखों के सामने। मेरे भतीजे को अपने पापा-मम्मी की शादी का वीडियो
देखने का बहुत शौक है। वो उसे जब भी चलाता है तो पुराना समय पर्दे पर साकार हो
जाता है। देश की आज़ादी के समय 14 अगस्त, 1947 की आधी रात को हमारे प्रथम प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू
का संविधान परिषद के सामने दिया गया ऐतिहासिक भाषण तो आप भी हर स्वतंत्रता दिवस पर
टीवी पर देखते-सुनते होंगे। आज यू-ट्यूब पर ऐसे कई ऐतिहासिक क्षणों के वीडियो मिल
जाएंगे। आजकल तो हमारा सोशल मीडिया खासतौर पर फेसबुक भी हमारे गुज़रे लम्हों को फिर हमारे बीच साझा कर देता है।
हमारी फिल्मों ने तो हमारे भूत, वर्तमान के
समय-समाज को बखूबी दर्ज किया है। मनोरंजक और कला फिल्मों सहित डॉक्यूमेट्री और साइंस
फिक्शन सरीखी फिल्मों ने हमारे भूत और वर्तमान के साथ-साथ हमारे भविष्य की
रूप-रेखा भी भली-भांति हमारे सामने खींच दी। तो दोस्तो इतनी तरह की टाइम मशीन
हमारे सामने हैं। और इसके अलावा हमारे मां-बाप, हमारे दादा-दादी, नाना-नानी और आप बच्चे तो हमारी जीती-जागती टाइम
मशीन हैं। मां-बाप के जरिये हम अपने बीते हुए कल और आज को जान सकते हैं तो अपने
बच्चों की आंखों में अपना भविष्य देख सकते हैं। बस सबके साथ थोड़ा समय बिताने की
ज़रूरत है। साथ बैठकर बतियाने की ज़रूरत है। तो दोस्तो, बताइए मिल गई न टाइम मशीन।
फिर देखिए, जाँचिए, परखिए मेरी बातों को और मज़े के साथ समय के आर-पार आवाजाही
कीजिए।
- ई-मेल- mukulsaral@gmail.com

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